चेहरा

“जिसे आँखें ढूँढती हैं, वही पलकों के पीछे रहता है।” एक चेहरा है आंखे बंद करता हूं सामने आता है आंखे खोलते ही ना जाने कहा गुम हो जाता है फिर आंखें बंद करता हूं सामने आता है वो शर्मता है या पालको के घूंघट को ओढे खुद को सबकी नजरों से बचाता है शायद डरता है इस दुनिया से या मेरी दुनिया मैं सिमट कर रहना चाहता है एक चेहरा है आंखे बंद करता हूं सामने आता है

✍️ “कभी-कभी कुछ चेहरे दिखाई नहीं देते, बस महसूस होते हैं वो आँखों में नहीं, एहसासों में बसते हैं। कभी दिख जाते हैं ख़ामोशी में, और कभी शोर में भी गुम हो जाते हैं उन लम्हों में, हम ख़ुद से मिलते हैं।”