कहने को सब कुछ है,
जो पास नहीं है
वही सब कुछ है।
चाहा था, फ़लक मिल जाए,
ज़मीन मिली,
जो फ़ासला है,
वही सब कुछ है।
जो मिला मिला,
जो न मिला,
वही सब कुछ है।
रास्ता ख़ूबसूरत था,
पर मंज़िल ही सब कुछ है।
ना लगा लगाव किसी से,
क्योंकि यहाँ
बदलता सब कुछ है।
✍️ “कभी-कभी ज़िंदगी पूरी लगती है, पर भीतर कोई कोना खाली रह जाता है। यही अधूरापन हमें सोचने, महसूस करने और आगे बढ़ने की वजह देता है। शायद पूर्णता की तलाश ही इंसान होने का सबसे खूबसूरत अधूरापन है।”