“कुछ ऊँचाइयाँ इंसान को बड़ा नहीं, दूर कर देती हैं।”
ऊंची ऊंची इमारते
मुझे छोटे होने का
एहसास कराती है।
उसका साया
मेरे हिस्से की धूप छीन
अँधेरा कर जाता है।
और ये जो हवा का झोंका है,
वो भी मेरे तक कम ही आता है।
पर ये जो बारिश है
दोनों को भीगाती है।
वो डरता है, भीग जाने से,
मुझे आदत है, भीग जाने की।
✍️ “ऊँचाई की अपनी कीमत है जितना ऊपर जाते हैं, उतना अकेले होते जाते हैं। नीचे की ज़मीन भले छोटी लगे, मगर वहीं इंसानियत अब भी साँस लेती है।”