यात्रा

चलना तो शुरू करो मंज़िल मिल ही जाएगी। राह के पत्थर रास्ता बताएँगे, पगडंडियाँ भी अपनी-अपनी कहानी सुनाएँगे। नमी है कुछ रास्ते पर क्योंकि कोई चला नहीं। कुछ हो गए हैं कठोर रोज़ाना कुचले जाने पर। सुबह की ताज़गी जो देगा, वही दोपहर तक झुलसेगा, फिर आसमान में रंग बिखेर सुकून भी देकर जाएगा। अँधेरा होगा तो तारे भी होंगे दिशा दिखाने को। अकेले पड़ोगे तो जुगनू भी मिलेंगे साथ निभाने को। ख़्याली पुलाव बनाने से, सोच में खो जाने से, कदम न बढ़ाने से मंज़िल नहीं मिलती। थोड़ा चलो तभी आगे की राह नज़र आएगी। चलना शुरू करोगे, मंज़िल मिल ही जाएगी।

✍️ “ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती ठहर जाना है। मंज़िल कभी दूर नहीं होती, बस पहला क़दम भारी लगता है। और जब वो उठ जाता है रास्ते खुद बिछने लगते हैं।